उत्तर प्रदेश

बसपा की सरकार फिर बनानी है: मायावती

Kavita2
23 Sept 2026 4:50 PM IST
बसपा की सरकार फिर बनानी है: मायावती
x

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों और पार्टी संगठन की स्थिति पर चर्चा हुई। मायावती ने पदाधिकारियों से चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत से जुटने को कहा और दावा किया कि मुकाबला त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में दोबारा सरकार बनाना होना चाहिए।

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा को उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सत्ता में लाने के लक्ष्य के साथ काम करना है। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, पार्टी के जनाधार को बढ़ाने और चुनाव के लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान देने को कहा।

बैठक में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। मायावती ने इन राज्यों में बसपा के अपने बलबूते चुनाव लड़ने की नीति दोहराई और पदाधिकारियों को संगठनात्मक तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए।

चुनावी तैयारियों में जुटने के निर्देश

मायावती ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुटने को कहा। उन्होंने पदाधिकारियों को जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति का आकलन करने और मतदाताओं तक पार्टी की बात पहुंचाने पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में उम्मीदवारों के चयन का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मायावती ने ऐसे उम्मीदवारों के चयन पर जोर दिया जो अपने विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत संगठनात्मक पकड़ रखते हों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय हों।

इसके साथ ही उन्होंने पहले दिए गए संगठनात्मक निर्देशों पर हुए काम की समीक्षा की। पार्टी की अलग-अलग इकाइयों से यह जानकारी ली गई कि संगठन विस्तार और जनसंपर्क से संबंधित निर्देशों पर कितना काम हुआ है।

पांचवीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य

मायावती ने बैठक में अपने पदाधिकारियों के सामने उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में राजनीतिक मुकाबले का स्वरूप चाहे जैसा हो, पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

बसपा इससे पहले मायावती के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बना चुकी है। इनमें गठबंधन और पूर्ण बहुमत वाली सरकारें शामिल रही हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था और मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं।

अब पार्टी नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर संगठन को दोबारा सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर पार्टी नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है।

अकेले चुनाव लड़ने की नीति दोहराई

बैठक में मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के विधानसभा चुनावों में पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की बात दोहराई। उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत और जनाधार के आधार पर चुनावी तैयारी करनी चाहिए।

बसपा नेतृत्व की ओर से पिछले कुछ समय से गठबंधन को लेकर इसी रुख को दोहराया जाता रहा है। बुधवार की बैठक में भी पार्टी ने फिलहाल इसी नीति को आगे बढ़ाने का संकेत दिया।

पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करने और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

गरीबी बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया

बैठक में मायावती ने गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सहित देशभर में विभिन्न वर्ग इन समस्याओं से परेशान हैं।

उन्होंने भाजपा की नीतियों की आलोचना करते हुए जातीय भेदभाव और विभिन्न सामाजिक वर्गों की उपेक्षा के आरोप भी लगाए। ये मायावती और बसपा के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर भाजपा की अलग प्रतिक्रिया या स्थिति हो सकती है।

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से सामाजिक आधार को विस्तार देने और विभिन्न समुदायों तक पहुंच बढ़ाने को कहा। बसपा लंबे समय से अपने राजनीतिक कार्यक्रम में बहुजन समाज के साथ अन्य सामाजिक समूहों को जोड़ने की रणनीति पर काम करती रही है।

वोट के अधिकार को बताया बड़ी ताकत

मायावती ने बैठक में संविधान और मतदान के अधिकार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार बहुजन समाज की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक ताकत है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतदाताओं के बीच जाकर उन्हें मतदान के महत्व और पार्टी की नीतियों के बारे में जानकारी देने को कहा।

बसपा का संगठन लंबे समय से बूथ और सेक्टर स्तर की संरचना के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास करता रहा है। 2027 के चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व इसी नेटवर्क को अधिक सक्रिय करने पर जोर दे रहा है।

संगठन की प्रगति की हुई समीक्षा

बुधवार की बैठक इस महीने बसपा की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक थी। इससे पहले 3 सितंबर को भी लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित हुई थी।

23 सितंबर की बैठक में अलग-अलग राज्यों से आए नेताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। पार्टी नेतृत्व ने पहले दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की और आगामी चुनाव वाले राज्यों की संगठनात्मक स्थिति पर फीडबैक लिया।

उत्तर प्रदेश में जिला और मंडल स्तर पर चल रही गतिविधियों के साथ बूथ नेटवर्क की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी

बैठक के दौरान मायावती ने अपने भतीजे ईशान आनंद को बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की घोषणा भी की। ईशान आनंद बैठक में शामिल हुए और नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने मायावती का आभार जताया।

यह नियुक्ति पार्टी के शीर्ष संगठन में एक और बदलाव है। हाल के सप्ताहों में बसपा के संगठनात्मक पदों में कई बदलाव हुए हैं। नई जिम्मेदारी के बाद ईशान आनंद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक काम में भूमिका निभाएंगे।

2027 पर बसपा का फोकस

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर बसपा ने संगठनात्मक बैठकों और चुनावी तैयारियों को तेज किया है। पार्टी के सामने अपने संगठन और मतदाता आधार को मजबूत करने की चुनौती है और मायावती लगातार पदाधिकारियों के साथ इसकी समीक्षा कर रही हैं।

बुधवार की बैठक में मायावती का मुख्य संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी पर केंद्रित रखने का रहा। उन्होंने पदाधिकारियों से उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर के संगठन तक सभी पहलुओं पर काम करने को कहा।

मायावती ने पार्टी नेताओं के सामने उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा। चुनावी मुकाबले का अंतिम स्वरूप और परिणाम मतदाताओं के फैसले से तय होगा, लेकिन बसपा नेतृत्व ने बैठक के जरिए स्पष्ट किया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ा रही है।

Next Story